मुलताई/बैतूल: मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की राजनीति में आज उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया, जब मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष नीतू प्रहलाद परमार ने कांग्रेस समर्थित खेमे का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण कर ली। बैतूल पहुँचकर वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व विधायक हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा की रीति-नीति पर विश्वास जताते हुए भगवा चोला ओढ़ लिया।
कुर्सी मिलते ही बदली राजनैतिक राह
गौरतलब है कि नीतू परमार का राजनीतिक सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रहा है। उनके पार्षद बनने से लेकर आज भाजपा जॉइन करने तक के घटनाक्रम ने सबको हैरान कर दिया है:
- निर्दलीय जीत से शुरुआत (2022): अगस्त 2022 के नगरीय निकाय चुनाव में नीतू परमार ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी और कांग्रेस के समर्थन से अध्यक्ष बनी थीं।
- कोर्ट की लंबी लड़ाई: उनकी इस जीत को विपक्षी खेमे ने अदालत में चुनौती दी, जिसके बाद जून 2023 में जिला कोर्ट ने उनके चुनाव को शून्य घोषित कर दिया था। लेकिन नीतू परमार ने हार नहीं मानी और हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपनी लड़ाई जारी रखी।
- ऐतिहासिक वापसी (अप्रैल 2026): लगभग तीन साल के कानूनी संघर्ष के बाद, 6 अप्रैल 2026 को जबलपुर हाई कोर्ट ने उन्हें क्लीन चिट देते हुए अध्यक्ष पद पर दोबारा बहाल करने का ऐतिहासिक आदेश सुनाया।
- अब 'कमल' के साथ नई पारी: हाई कोर्ट से अपनी कुर्सी वापस पाने के ठीक एक महीने बाद, नीतू परमार ने अब सत्ताधारी दल भाजपा का दामन थाम लिया है।
हेमंत खंडेलवाल का नेतृत्व और बदले समीकरण
नीतू परमार का भाजपा में शामिल होना मुलताई विधानसभा क्षेत्र के समीकरणों को पूरी तरह बदल देगा। भाजपा के कद्दावर नेता हेमंत खंडेलवाल की उपस्थिति में यह प्रवेश दर्शाता है कि आने वाले समय में मुलताई नगर के विकास और संगठन में नीतू परमार की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होने वाली है।
विपक्ष के लिए बड़ा झटका
नीतू परमार के भाजपा में जाने से मुलताई नगर पालिका परिषद में अब भाजपा का पलड़ा बेहद भारी हो गया है। उनके साथ आए सैकड़ों समर्थकों ने यह साफ कर दिया है कि मुलताई की जनता अब विकास की मुख्यधारा के साथ चलना चाहती है। इस दलबदल को मुलताई कांग्रेस के लिए एक बड़े राजनैतिक नुकसान के तौर पर देखा जा रहा है।
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