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मुलताई: भाजपा कार्यालय के सामने ही 'लावारिस' हुई सड़क; इंदिरा गांधी और पटेल वार्ड के फेर में पिस रही जनता! ।


 नगर पालिका के 15 वार्डों की साझा बीमारी बनी 'सीमा विवाद', सत्ता के केंद्र के नीचे ही विकास ने तोड़ा दम।


स्थान: मुलताई (ब्यूरो: पाशा खान)

मुख्य समाचार:

पवित्र नगरी मुलताई के विकास और सुशासन के दावों की पोल खोलने वाली एक ऐसी जमीनी हकीकत सामने आई है, जो सीधे सत्ता के गलियारे से जुड़ी है। मुलताई नगर पालिका के तहत आने वाले इंदिरा गांधी वार्ड और पटेल वार्ड को आपस में जोड़ने वाली मुख्य संपर्क सड़क पिछले लंबे समय से बदहाली का शिकार है। हैरान करने वाली बात यह है कि यह वही सड़क है जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नगर कार्यालय के ठीक सामने से नीचे की ओर उतरती है। सत्ता के मुख्य केंद्र के ठीक सामने होने के बावजूद इस सड़क का कोई 'मई-बाप' नजर नहीं आ रहा है।

​15 वार्डों की साझा बीमारी – 'सीमा विवाद'

​मुलताई में यह कोई इकलौती सड़क नहीं है। नगर पालिका के कुल 15 वार्डों में ऐसी कई सीमावर्ती सड़कें हैं जो दो वार्डों के फेर में उलझकर लावारिस हो चुकी हैं। जब भी इन सड़कों के निर्माण या मरम्मत की बात आती है, तो दोनों वार्डों के पार्षद और जिम्मेदार अधिकारी तकनीकी पेंच और 'क्षेत्राधिकार' (Jurisdiction) का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। नतीजा यह होता है कि जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरसना पड़ता है।

​पॉलिटिकल हब के सामने ही 'अंधेर नगरी'

​स्थानीय नागरिकों और राहगीरों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जिस मार्ग से क्षेत्र के रसूखदार नेताओं और नगर पालिका के अधिकारियों का रोज आना-जाना होता है, उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। इंदिरा गांधी वार्ड और पटेल वार्ड को जोड़ने वाला यह मार्ग ढलान पर होने के कारण अब बेहद खतरनाक हो चुका है। गिट्टियां पूरी तरह उखड़ चुकी हैं, धूल का गुबार उड़ रहा है और बड़े-बड़े गड्ढे किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं।

जनता का तीखा सवाल:

"चुनाव में वोट देते समय हमारा वोट आधा नहीं होता, टैक्स भरते समय नगर पालिका हमसे आधा पैसा नहीं लेती; तो फिर सड़क बनाने के समय इसे आधा-आधा बताकर लावारिस क्यों छोड़ दिया जाता है? क्या राजनेताओं की गाड़ियां इन गड्ढों से नहीं गुजरतीं?"


​'ऑल इंडिया खबर' के तीखे सवाल:

  1. ​क्या मुलताई नगर पालिका के पास दो वार्डों को जोड़ने वाली सड़कों के लिए कोई विशेष फंड या नीति नहीं है?
  2. ​सत्ताधारी दल के कार्यालय के ठीक सामने की बदहाली पर संगठन और प्रशासन मौन क्यों हैं?
  3. ​क्या 15 वार्डों के इस सीमा विवाद की सजा मुलताई की जनता यूं ही भुगतती रहेगी?

निष्कर्ष:

भाजपा कार्यालय के ठीक सामने की यह बदहाली साफ दर्शाती है कि नगर पालिका प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय (Coordination) की कितनी भारी कमी है। अब देखना यह होगा कि 'ऑल इंडिया खबर' की इस ग्राउंड रिपोर्ट के बाद क्या जिम्मेदार अधिकारी और दोनों वार्डों के पार्षद आपसी सामंजस्य बिठाकर इस सड़क का कायाकल्प करते हैं, या फिर सत्ता की नाक के नीचे जनता यूं ही हिचकोले खाने को मजबूर रहेगी।

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