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मुलताई: किसानों की तकदीर जलकर खाक, सरकारी 'रक्षक' निर्माण कार्य में व्यस्त; मुलताई विधानसभा की बड़ी योजना को लगा लापरवाही का पलीता!

मुलताई (✍️पाशा खान✍️)। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की मुलताई जनपद पंचायत से लापरवाही की एक ऐसी हृदयविदारक तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र के आपदा प्रबंधन के दावों को राख कर दिया है। एक तरफ जहाँ जम्बाड़ी और धारणी के खेतों में भीषण आग ने किसानों की साल भर की मेहनत को चंद घंटों में खाक कर दिया, वहीं दूसरी ओर आपदा के समय सबसे बड़ा सहारा बनने वाला 'फायर फाइटर' मौके से नदारद मिला।

6 घंटे का 'अग्नि तांडव': बेबस होकर रोता रहा अन्नदाता

​जानकारी के अनुसार, जम्बाड़ी के खेतों में अज्ञात कारणों से लगी आग ने हवा के झोंकों के साथ विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते आग ने धारणी क्षेत्र को भी अपनी चपेट में ले लिया। स्थानीय प्रशासन की सूचना पर मुलताई नगर पालिका की दमकल टीमें मौके पर पहुँचीं और करीब 6 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। लेकिन तब तक किसानों का सब कुछ लुट चुका था। गेहूं की तैयार फसल, मवेशियों का भूसा और सिंचाई के लिए रखे महंगे पाइप व मशीनें जलकर लोहे का ढेर बन गईं।

कड़वा सच: निर्माण कार्य की 'तराई' कर रहा था सरकारी 'फायर फाइटर'

​जब ग्रामीण अपनी आंखों के सामने अपनी गृहस्थी को जलते देख रहे थे, तब पंचायत को दी गई 'फायर फाइटर' गाड़ी गांव में ही एक पुलिया निर्माण के कार्य में पानी डालने के लिए इस्तेमाल की जा रही थी। यह खुलासा होते ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। जिस संसाधन को लाखों रुपये खर्च कर आगजनी रोकने के लिए खरीदा गया था, उसका उपयोग निर्माण कार्य जैसे गैर-जरूरी काम में करना भ्रष्टाचार और लापरवाही की पराकाष्ठा है।

मुलताई विधानसभा की 'महत्वाकांक्षी योजना' का हुआ अपमान

​उल्लेखनीय है कि मुलताई विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्रों को सुरक्षित करने के उद्देश्य से विधायक निधि और जनपद निधि के माध्यम से बड़ी ग्राम पंचायतों को 'ट्रैक्टर-चलित फायर फाइटर टैंकर' वितरित किए गए थे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह था कि मुलताई के दूरदराज के गांवों में, जहाँ नगर पालिका की बड़ी दमकल पहुँचने में समय लगता है, वहाँ स्थानीय स्तर पर ही 10-15 मिनट में आग बुझाई जा सके।

जम्बाड़ी की घटना ने योजना की पोल खोल दी:

  • क्लस्टर मॉडल फेल: मुलताई विधानसभा में 'क्लस्टर मॉडल' के तहत इन टैंकरों को बड़ी पंचायतों में रखा गया था ताकि आसपास के 5-10 गाँव सुरक्षित रहें। लेकिन जम्बाड़ी की इस घटना ने बता दिया कि ये टैंकर अब पंचायतों के निजी कार्यों की 'वॉटर सप्लाई' गाड़ी बनकर रह गए हैं।
  • नियमों की धज्जियाँ: इन टैंकरों में हाई-प्रेशर गन लगी होती है जो ट्रैक्टर के इंजन (PTO) से चलती है, लेकिन इनका उपयोग तराई में करके इनकी क्षमता को नष्ट किया जा रहा है।

प्रशासनिक हंटर: SDM ने सचिव को लगाई कड़ी फटकार

​घटना की गंभीरता को देखते हुए मुलताई एसडीएम राजीव कहार ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने ग्राम पंचायत सचिव आशाराम हरोड़े को तलब कर फटकार लगाई और स्पष्ट किया कि फायर फाइटर का उपयोग निर्माण कार्य में करना नियमों का सीधा उल्लंघन है।

एसडीएम का बयान: "पंचायतों को फायर फाइटर केवल इमरजेंसी के लिए दिए गए हैं। यदि भविष्य में किसी भी पंचायत में इसका दुरुपयोग पाया गया, तो संबंधित सचिव और जिम्मेदार अधिकारियों पर निलंबन जैसी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।"


ऑल इंडिया खबर के तीखे सवाल:

  1. ​जब मुलताई विधानसभा के किसानों की फसल जल रही थी, तब क्या पंचायत सचिव को पुलिया निर्माण अधिक जरूरी लगा?
  2. ​क्या मुलताई के अन्य क्षेत्रों में भी फायर फाइटर टैंकर इसी तरह धूल खा रहे हैं या दुरुपयोग किए जा रहे हैं?
  3. ​क्या प्रशासन उन किसानों के नुकसान की भरपाई उन जिम्मेदारों से करेगा जिनकी लापरवाही से समय पर मदद नहीं मिली?

निष्कर्ष: मुलताई का किसान आज ठगा हुआ महसूस कर रहा है। सरकार ने मशीनें तो दे दीं, लेकिन जिम्मेदारों की 'नियत' ने उन मशीनों को खिलौना बना दिया। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या नजीर पेश करता है।

ब्यूरो रिपोर्ट: ऑल इंडिया खबर

(सच, जो आप जानना चाहते हैं)

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