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मुलताई विशेष: 'प्यासा' पड़ा है प्याऊ, बेहाल हैं पंछी और राहगीर, क्या यही है नगर पालिका का 'जल प्रबंधन'?



मुलताई ( पाशा खान ) | 28 अप्रैल, 2026

​बैतूल जिले के मुलताई में सूरज आग उगल रहा है। पारा 40°C के पार जा चुका है और गर्म हवाओं (लू) के थपेड़ों ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर बैतूल ने पहले ही स्कूल बंद करने और लू का अलर्ट जारी करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन मुलताई नगर पालिका प्रशासन इस भीषण आपदा में भी गहरी नींद में सोया हुआ है।

लाखों का खर्च, पर गला सूखा का सूखा

​नगर पालिका ने शहर के प्रमुख स्थानों— नागपुर नाका, मुलताई स्टेशन और साप्ताहिक बाजार— में प्याऊ तो बनवा दिए, लेकिन विडंबना देखिए कि इन प्याऊ में पानी का नामोनिशान नहीं है। स्टेशन से उतरकर आने वाले यात्री प्यास से बेहाल होकर भटक रहे हैं, वहीं बाजार आने वाले ग्रामीणों के पास महंगे बोतल बंद पानी खरीदने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

'प्यासे पंछी' अभियान की चेतावनी: बेजुबानों पर भी गहरा संकट

​इंसानों के साथ-साथ आसमान के बेजुबान परिंदे भी इस लापरवाही का शिकार हो रहे हैं। सामाजिक मुहिम 'Thirsty Birds' (प्यासे पंछी) से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब सरकारी प्याऊ ही सूखे पड़े हैं, तो बेजुबान पक्षी पानी की तलाश में कहाँ जाएँ? आसमान से बरसती आग और जमीन पर सूखे जल स्रोतों के बीच इन पक्षियों का अस्तित्व खतरे में है।

प्रशासन से तीखे सवाल:

  1. ​जब कलेक्टर ने गर्मी को लेकर अलर्ट जारी किया है, तो नगर पालिका ने पानी की व्यवस्था सुनिश्चित क्यों नहीं की?
  2. ​क्या प्याऊ केवल कागजी खानापूर्ति और बजट ठिकाने लगाने के लिए बनाए गए थे?
  3. ​स्टेशन और नागपुर नाका जैसे व्यस्त क्षेत्रों में यात्रियों की प्यास का जिम्मेदार कौन है?

जनता की पुकार: "अब प्यास बुझाने कौन आएगा?"

​मुलताई के स्थानीय निवासियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि नगर पालिका के अधिकारी एसी कमरों में बैठे हैं, जबकि आम जनता और राहगीर सड़क पर बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। यदि अगले 24 घंटों में प्याऊ में पानी की सप्लाई शुरू नहीं हुई, तो जनता उग्र आंदोलन के लिए विवश होगी।

रिपोर्ट: पाशा खान (ऑल इंडिया खबर)

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