मुलताई ( पाशा खान )। मध्य प्रदेश के मुलताई शहर में प्रशासनिक लापरवाही का एक ऐसा नमूना सामने आया है, जिसने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। शहर के सबसे व्यस्ततम मार्ग—आंबेडकर चौक से गांधी चौक—तक की सड़क आज विकास की नहीं, बल्कि जिम्मेदारों की अनदेखी की कहानी बयां कर रही है।
17 लाख का बजट, फिर भी हादसों का 'जंक्शन'
हैरानी की बात यह है कि जिस सड़क को चमकाने के लिए कायाकल्प योजना के तहत 17 लाख 16 हजार रुपए की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई थी, वह आज जानलेवा बन चुकी है। नगर पालिका ने 16 जुलाई 2024 को ग्वालियर की फर्म 'अरोरा एच. आर. कंसल्टेंसी' को वर्क ऑर्डर जारी किया था। नियम के मुताबिक यह काम 60 दिनों में पूरा होना था, लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी सड़क अधूरी और बदहाल पड़ी है।
जेसीबी से खोदकर राहें कीं दुश्वार
स्थानीय नागरिकों का आक्रोश सातवें आसमान पर है। जानकारी के अनुसार:
- ठेकेदार ने गुरुसाहब मंदिर से तौफीक नेता के घर तक औपचारिकता के लिए सड़क बनाई और काम रोक दिया।
- इसके आगे की सड़क को जेसीबी से रफ (खोदकर) छोड़ दिया गया, जिससे पैदल चलना भी दूभर हो गया है।
- यह मार्ग गल्ला मंडी, मटन मार्केट और नाका नंबर 1 जैसे 5 प्रमुख रास्तों को जोड़ता है, जहाँ रोजाना हजारों लोग जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं।
अधिकारी मौन, क्या बड़े हादसे का है इंतजार?
सड़क निर्माण तत्कालीन प्रभारी इंजीनियर सुभाष शर्मा की निगरानी में शुरू हुआ था, लेकिन उनके हटते ही प्रोजेक्ट फाइलों में दफन हो गया। जनता अब सीधे सवाल पूछ रही है:
- आखिर वह कौन सा 'पेच' है जिसके कारण ठेकेदार ने काम बीच में छोड़ दिया?
- क्या समय सीमा खत्म होने के बाद ठेकेदार पर कोई पेनाल्टी लगाई गई?
- आने वाली बारिश में जब ये गड्ढे और गहरे होंगे, तब हादसों का जिम्मेदार कौन होगा?
"सड़क की हालत पहले से भी बदतर हो गई है। जगह-जगह खुदाई और गड्ढों के कारण राहगीरों को भारी परेशानी हो रही है। प्रशासन जल्द कुछ करे वरना स्थिति बेकाबू होगी।" > — स्थानीय नागरिक
आंदोलन की चेतावनी
आंबेडकर चौक और गांधी चौक के व्यापारियों व रहवासियों ने साफ कर दिया है कि यदि जल्द काम शुरू नहीं हुआ, तो वे नगर पालिका के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करेंगे। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन कब जागता है।
ब्यूरो रिपोर्ट: ऑल इंडिया खबर ( पाशा खान )
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