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विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: मुलताई में 'मौत की गोली' का काला बाज़ार: क्या प्रशासन किसी और का इंतज़ार कर रहा है?


मुलताई ( पाशा खान ) मुलताई के बाजारों में 'सल्फास' (एल्युमिनियम फॉस्फाइड) की सहज उपलब्धता ने कई हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया है। अनाज संरक्षण के नाम पर बिकने वाला यह जहर अब एक 'सुसाइड टूल' बन चुका है। ऑल इंडिया खबर की टीम की पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जो सीधे तौर पर प्रशासन की विफलता को दर्शाते हैं।

क्या कहता है कानून?

​कीटनाशक अधिनियम (Insecticides Act, 1968) के तहत सल्फास की बिक्री को लेकर बेहद कड़े नियम हैं:

  • ​इसकी बिक्री सार्वजनिक रूप से नहीं की जा सकती; इसके लिए विक्रेता के पास विशेष लाइसेंस अनिवार्य है।
  • ​प्रत्येक खरीददार का नाम, पता, आधार कार्ड और उपयोग का ठोस कारण रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य है।
  • खुली बिक्री पर दंड: नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों पर भारी जुर्माना लगाने और उनका लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द करने का कानूनी प्रावधान है।

मौत का आसान ज़रिया: 'गेहूं' का बहाना

​बाजार में स्थिति बिल्कुल उलट है। अनाज में कीड़े न लगें, यह कहकर दुकानदार बिना किसी सवाल-जवाब के किसी को भी सल्फास की डिब्बी थमा देते हैं। इस 'आसान उपलब्धता' के कारण लोग आवेश में आकर गलत कदम उठा रहे हैं।

शरीर पर कैसे असर करता है यह जहर?

​सल्फास का सेवन करने के कुछ ही मिनटों बाद यह पेट में मौजूद नमी या एसिड के साथ प्रतिक्रिया कर 'फॉस्फीन गैस' छोड़ता है। यह गैस शरीर की कोशिकाओं (Cells) तक ऑक्सीजन की आपूर्ति को पूरी तरह रोक देती है। मेडिकल विज्ञान के अनुसार, इसका कोई सटीक 'एंटीडोट' (विष नाशक) नहीं है, जिसके कारण मल्टी-ऑर्गन फेलियर से कुछ ही मिनटों में व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।

सबसे बड़ा सवाल: पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट के बाद भी चुप्पी क्यों?

​अक्सर आत्महत्या के मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सल्फास की पुष्टि होती है, लेकिन पुलिस की जांच वहीं खत्म हो जाती है। सवाल यह है कि:

  • ​पुलिस जहर के 'स्रोत' (Source) की जांच क्यों नहीं करती?
  • ​जिस दुकानदार ने बिना आईडी प्रूफ के जहर बेचा, उस पर गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) का केस क्यों दर्ज नहीं होता?
  • ​जब जहर का स्रोत ही नहीं पता लगाया जाएगा, तो यह काला बाज़ार कैसे बंद होगा?

प्रशासन की अनदेखी और समाधान की राह

​प्रशासन की उदासीनता के कारण ही ये हादसे बार-बार हो रहे हैं। समाधान के लिए ये कदम आवश्यक हैं:

  • औचक निरीक्षण: प्रशासन को कीटनाशक विक्रेताओं और मेडिकल स्टोर्स पर सख्त छापेमारी करनी चाहिए।
  • विक्रेताओं की जवाबदेही: हर सल्फास की बिक्री के साथ विक्रेता की जिम्मेदारी तय की जाए।
  • जन जागरूकता: कृषि विभाग किसानों को सल्फास के सुरक्षित विकल्पों (जैसे आधुनिक स्टोरेज बैग) के बारे में शिक्षित करे।
  • संपादकीय टिप्पणी: क्या मुलताई प्रशासन किसी और बड़ी घटना का इंतज़ार कर रहा है? एक पत्रकार के रूप में, हम प्रशासन से जवाब मांगते हैं कि अब तक कितने कीटनाशक विक्रेताओं पर नियमों के उल्लंघन के लिए कार्रवाई की गई है?

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