मुलताई। एक ओर जहाँ राज्य सरकार गोवंश के संरक्षण और उनके सम्मानजनक अंतिम संस्कार के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं मुलताई नगर पालिका की कचरा खंती (डंपिंग साइट) पर मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। यहां खुले में पड़े गाय के शव को कुत्ते नोच रहे थे, जिसे देखकर स्थानीय लोग और गो-भक्तों में गहरा आक्रोश है।
क्या कहते हैं नियम? (कानूनी स्थिति)
मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स के तहत, नगर निकायों की यह अनिवार्य वैधानिक जिम्मेदारी है कि वे मृत पशुओं का वैज्ञानिक और सम्मानजनक तरीके से निपटान करें।
- नियम का उल्लंघन: कानून स्पष्ट कहता है कि किसी भी मृत पशु को खुले में छोड़ना या उसे सड़ने के लिए मजबूर करना दंडनीय अपराध है।
- नगरपालिका का कर्तव्य: यदि गोवंश की मृत्यु होती है, तो संबंधित निकाय को 24 घंटे के भीतर या तो उसे नगर पालिका द्वारा निर्धारित श्मशान/दफन स्थान पर ले जाना होता है, या फिर सूचना मिलते ही उसका सम्मानजनक निपटान करना होता है।
- लापरवाही पर कार्रवाई: नियमों के तहत, सार्वजनिक स्थल पर शव छोड़ने या कर्तव्य में कोताही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर जुर्माना और विभागीय कार्रवाई का प्रावधान है।
प्रशासन की चुप्पी और "पल्ला झाड़ने" की संस्कृति
घटना के संबंध में जब एल्डरमेन श्याम ढोमने ने सीएमओ वीरेंद्र तिवारी को सूचित किया, तो सीएमओ द्वारा जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है। कचरा खंती पर 3 से 4 कर्मचारियों की ड्यूटी होने के बावजूद मौके पर एक भी कर्मचारी का न होना, यह साबित करता है कि नगर पालिका में जवाबदेही का पूरी तरह अभाव है।
सरकार पर बड़ा सवाल
मुलताई की यह घटना सीधे तौर पर सरकार के दावों पर सवाल उठाती है:
- बजट कहाँ खर्च हो रहा है? जब स्वच्छता और पशु नियंत्रण के लिए प्रतिवर्ष करोड़ों का बजट आवंटित है, तो कर्मचारी ड्यूटी पर क्यों नहीं हैं?
- गो-रक्षक बनाम सिस्टम: सरकार गो-संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात करती है, लेकिन स्थानीय अधिकारी गो-सेवकों की शिकायतों को भी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
- क्या कागजों पर ही सिमटा है गो-संरक्षण? यह व्यवस्था की विफलता है कि जिस गाय को हम 'माता' का दर्जा देते हैं, उसे मृत्यु के बाद सम्मान तक नसीब नहीं हो रहा।
जनता की मांग:
स्थानीय नागरिक और गो-भक्त मांग कर रहे हैं कि संबंधित अधिकारियों पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई हो और कचरा खंती पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के साथ-साथ डेडिकेटेड स्टाफ तैनात किया जाए।
क्या मुलताई प्रशासन इस घटना के बाद कुंभकर्णी नींद से जागेगा, या फिर गायों का अपमान यूं ही चलता रहेगा?
रिपोर्ट: ऑल इंडिया Khabar
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