भोपाल/मुलताई। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए शुरू की गई 'CM Rise' योजना अब सवालों के घेरे में है। राज्य भर से आ रही शिकायतों के अनुसार, कई सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों से आने वाले छात्रों को प्रवेश देने से मना किया जा रहा है। मुलताई इसका एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जहाँ अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
पूरे प्रदेश में चिंता का विषय:
मध्य प्रदेश के अन्य जिलों की तरह ही मुलताई में भी 'शिक्षा का अधिकार' (RTE Act) हाशिए पर है। नियम यह है कि कोई भी छात्र अपनी शिक्षा कहीं भी जारी रख सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि स्कूल प्रबंधन ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) और स्थानीय दबाव के नाम पर गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों के भविष्य पर 'फुल स्टॉप' लगा रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर खड़े होते बड़े सवाल:
- शिक्षा विभाग की नीति क्या है?: क्या सरकार का लक्ष्य सरकारी स्कूलों को 'एक्सक्लूसिव' बनाना है या हर बच्चे को साक्षर बनाना?
- प्रवेश प्रक्रिया का सरलीकरण कहाँ है?: जब राज्य सरकार दावा करती है कि सरकारी स्कूलों में प्रवेश आसान है, तो फिर बच्चों को स्कूलों से बाहर का रास्ता क्यों दिखाया जा रहा है?
- निजी स्कूलों को फायदा?: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी स्कूल दाखिले से इनकार करेंगे, तो अभिभावक अंततः निजी स्कूलों की भारी-भरकम फीस भरने को मजबूर होंगे। क्या यह सरकार की मंशा है?
हमारा रुख (All India Khabar का स्टैंड):
'ऑल इंडिया खबर' इस मामले को राज्य के शिक्षा मंत्री और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। हम मांग करते हैं:
- तत्काल प्रभाव से प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
- दाखिले से मना करने वाले स्कूलों और अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।
- हेल्पलाइन नंबर जारी हो, ताकि अभिभावक अपनी शिकायत सीधे राज्य स्तर पर दर्ज करा सकें।
0 टिप्पणियाँ