all india khabr

all india khabr

अस्पताल ठप, मरीज बेहाल! संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू ।


बैतूल/मुलताई: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल और चरणबद्ध आंदोलन के कारण जिले सहित पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। अस्पतालों में मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर अपनी मांगों को लेकर अड़े कर्मचारियों ने अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।


​इसी क्रम में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, जिला इकाई बैतूल द्वारा धरना प्रदर्शन स्थल पर एक अनोखा विरोध प्रदर्शन देखा गया, जहां कर्मचारियों ने "एन.एच.एम. के लिये सद्बुद्धि यज्ञ" का आयोजन किया । कर्मचारियों का कहना है कि सरकार को जगाने और उनकी मांगों को पूरा करने की प्रेरणा देने के लिए उन्होंने यह यज्ञ किया है।

क्यों हो रही है हड़ताल? (मुख्य मांगें)

​आधिकारिक पत्र के अनुसार, संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ मध्य प्रदेश (भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध) ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर यह आंदोलन शुरू किया है। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

  • नियमितीकरण की मांग: माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा 30 जनवरी 2026 को दशहरा मैदान टी.टी. नगर में अभिनंदन कार्यक्रम के दौरान की गई घोषणा के अनुरूप सभी संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए।
  • NPS और स्वास्थ्य बीमा: सामान्य प्रशासन 2023 की नीति के अनुसार एन.पी.एस. (NPS) एवं स्वास्थ्य बीमा का लाभ प्रदान किया जाए।
  • वेतन वृद्धि और महंगाई भत्ता: अन्य राज्यों की भांति 10 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि दी जाए और नियमित कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता (DA) प्रदान किया जाए।
  • वेतन विसंगति दूर करना: शासन द्वारा तय की गई गलत समकक्षता (वेतन विसंगति) को दोबारा विचार कर संशोधित किया जाए।
  • सार्थक ऐप का विरोध: शासन की मंशानुरूप जब तक समान कार्य-समान वेतन और सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक 'सार्थक ऐप' बंद किया जाए।

32 हजार कर्मचारियों की अनदेखी का आरोप

​कर्मचारी संघ का कहना है कि प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र को सुचारू रूप से चलाने में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के 32 हजार संविदा कर्मचारी पूरी निष्ठा से सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उनके हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है। संघ ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि 20 दिनों के भीतर इन मांगों का निराकरण नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे, जिसके बाद अब यह अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन और हड़ताल जारी है।

अस्पतालों में बढ़े मरीजों के संकट

​हड़ताल के कारण ओपीडी, प्राथमिक उपचार, और ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो रही हैं। यदि सरकार और प्रशासन ने जल्द ही संविदा कर्मचारियों से संवाद कर बीच का रास्ता नहीं निकाला, तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य संकट और गहरा सकता है।

- ब्यूरो रिपोर्ट, ( पाशा खान ) ऑल इंडिया खबर

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ