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ब्लास्टिंग या कुदरत का कहर ? 2 साल में कई बार कांपी मुलताई नगरी, फैक्ट्रियों पर गंभीर सवाल!


मुलताई (बैतूल) | विशेष रिपोर्ट: पाशा खान

मुलताई: क्या प्रभात पट्टन क्षेत्र में हो रहे भारी धमाकों ने मुलताई की नींव खोखली कर दी है? पिछले एक हफ्ते में 29 मार्च से लेकर 4 अप्रैल 2026 तक लगातार 4 बार महसूस किए गए भूकंप के झटकों ने नगरवासियों की रातों की नींद हराम कर दी है।

1. पिछले 2 साल का 'ब्लैक बॉक्स' - मुलताई का डरावना इतिहास

​NCS (National Center for Seismology) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मुलताई-बैतूल बेल्ट अब एक 'सीस्मिक हॉटस्पॉट' बन चुका है। पिछले 24 महीनों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं:

  • 04 अप्रैल 2026 (आज): सुबह 03:55 बजे, 2.8 तीव्रता, गहराई मात्र 5 किमी।
  • 03 अप्रैल 2026: रात 11:24 बजे, 3.0 तीव्रता (अब तक का सबसे डरावना झटका)।
  • 29 मार्च 2026: सुबह के वक्त 2.7 और 2.9 तीव्रता के दो झटके।
  • विगत 2 वर्ष: इसी तरह के 5-6 अन्य झटके दर्ज किए गए, जिनकी गहराई हमेशा 5-7 किमी ही रही।
  • वैज्ञानिक विश्लेषण: भू-गर्भ विज्ञान के अनुसार, इतनी कम गहराई पर कंपन तभी होता है जब सतह के करीब भारी विस्फोट (Mining Blasting) किए जा रहे हों। इसे 'Induced Seismicity' (मानव निर्मित भूकंप) की श्रेणी में रखा जा सकता है।


    2. नरखेड़ कोंडर का 'डेथ जोन': 12 किमी की दूरी पर मौत का खेल?

    ​हमारी पड़ताल में सामने आया है कि मुलताई से मात्र 10-12 किलोमीटर दूर नरखेड़ कोंडर के पास स्थित ब्लास्टिंग फैक्ट्रियां इस दहशत का असली केंद्र हो सकती हैं। पट्टन रोड का मार्ग सीधा होने के कारण धमाकों की 'शॉकवेव्स' बिना किसी रुकावट के मुलताई के रिहायशी इलाकों तक पहुँच रही हैं।

    3. सोशल मीडिया पर फूटा आक्रोश: "जनता की जुबानी, दहशत की कहानी"

    ​प्रशासन भले ही मौन हो, लेकिन सोशल मीडिया पर नगरवासियों का दर्द साफ छलक रहा है। हनी खुराना ने फेसबुक पर मोर्चा खोलते हुए लिखा:

    "मुलताई के समीप नरखेड़ गांव के पास की फैक्ट्री में ब्लास्ट होता है, उसका असर है क्या ये? क्योंकि जमीन के नीचे कुछ फटने जैसा एहसास हुआ। आवाज के साथ भूकंप जैसा कंपन हुआ, जिसे पूरे नगर ने महसूस किया है। जांच होनी चाहिए!"


    इस पोस्ट पर जनता की तीखी प्रतिक्रियाएं:

    • राजेश पवार का दर्द: "हमारे यहाँ इसकी वजह से दिन में 2 बार भूकंप आता है, सारे घर के प्लास्टर फट गए हैं। करवाने वाले का भला नहीं होगा!"
    • बब्बल सेवतकर का सवाल: "झटका तो मुझे भी लगा था, पर भूकंप नापने वाले रिक्टर पैमाने पर आधिकारिक संदेश क्यों नहीं आया? इसकी जांच होनी चाहिए!"
    • अखिलेश फुलवार का आरोप: "नरखेड़ कोंडर के पास की ब्लास्टिंग की जांच होनी चाहिए। खतरा सभी को है, प्रशासन अभी तक अलर्ट क्यों नहीं हुआ?"

    4. 'All India Khabar' के प्रशासन से 5 सुलगते सवाल:

    1. रात की ब्लास्टिंग पर रोक क्यों नहीं? रात 11:24 और सुबह 03:55 पर ही झटके क्यों? क्या रात के अंधेरे में नियमों को ताक पर रखकर बारूद फोड़ा जा रहा है?
    2. वाइब्रेशन मॉनिटरिंग कहाँ है? क्या माइनिंग विभाग ने इन फैक्ट्रियों के धमाकों की तीव्रता कभी मापी है?
    3. Induced Seismicity की जांच: क्या प्रशासन को पता है कि ये धमाके जमीन की परतों को हिलाकर 'कृत्रिम भूकंप' पैदा कर रहे हैं?
    4. मकानों की दरारों का जिम्मेदार कौन? राजेश पवार जैसे नागरिकों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
    5. प्रशासनिक चुप्पी का राज: जब वैज्ञानिक संस्था (NCS) झटकों की पुष्टि कर रही है, तो स्थानीय प्रशासन जांच से पीछे क्यों हट रहा है?

    निष्कर्ष:

    ​मुलताई अब दहशत के साये में जीने को तैयार नहीं है। यदि प्रभात पट्टन और नरखेड़ बेल्ट की इन फैक्ट्रियों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह शांति एक बड़े जनांदोलन में बदल सकती है।

    देखते रहिए 'All India Khabar', हम उठाएंगे आपकी आवाज़!


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