बैतूल/मुलताई ( पाशा खान ): बैतूल जिले में वन्य प्राणियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सोमवार को दो अलग-अलग घटनाओं में दो चिंकारा की मौत हो गई। जहाँ एक चिंकारा ने फेंसिंग में फंसकर दम तोड़ा, वहीं दूसरे को बचाने के लिए एक ऑटो चालक ने जांबाजी दिखाई, लेकिन अस्पताल पहुँचते-पूँछते उसकी भी सांसें थम गईं।
घटना 1: 7 फीट की फेंसिंग में फंसकर तोड़ा दम
थाना क्षेत्र के ग्राम डहरगांव के पास स्थित 'हार्टीफ्रूट आईबेरिज' कंपनी के परिसर में सोमवार सुबह करीब 7:30 बजे एक दो वर्षीय चिंकारा का शव मिला। उप वन मंडल अधिकारी संजय साल्वे और रेंजर नितिन पवार ने बताया कि चिंकारा की पसलियां टूटी हुई थीं और शरीर पर फेंसिंग के तारों के घाव थे। संभावना है कि 7 फीट ऊंची तार की फेंसिंग लांघने के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गया। वन विभाग ने सीसीटीवी फुटेज खंगालने और अज्ञात के खिलाफ वन्य प्राणी अधिनियम की धारा 9 के तहत केस दर्ज करने की बात कही है।
घटना 2: 'देवदूत' बना ऑटो चालक, पर नहीं मिली चिंकारा को जिंदगी
इसी दौरान नेशनल हाईवे 47 पर सापना घाट के पास मानवता की एक मिसाल देखने को मिली। ऑटो चालक दिनेश बारंगे अपने ऑटो का फिटनेस कराकर लौट रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि कुत्तों का झुंड एक चिंकारा को नोच रहा है। दिनेश अपनी सवारियों के साथ तुरंत 1 किलोमीटर दूर खेत में पहुंचे और पत्थरों से कुत्तों को भगाया।
लहूलुहान चिंकारा को अपने ऑटो में रखकर वे 27 किलोमीटर दूर मुलताई के अस्पताल भागे। रास्ते में कुछ लोगों ने विवाद कर उन्हें रोकने की कोशिश भी की, लेकिन दिनेश नहीं रुके। हालांकि, अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने चिंकारा को मृत घोषित कर दिया। दिनेश ने बाद में मृत चिंकारा को वन कर्मियों के सुपुर्द किया।
ऑल इंडिया खबर की विशेष रिपोर्ट: सुरक्षा या सजा?
डहरगांव की घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा के लिए लगाई गई 7 फीट ऊंची नुकीली फेंसिंग वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। वहीं, सापना घाट की घटना हाईवे पर बढ़ते आवारा कुत्तों के खतरे को दर्शाती है।
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