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मुलताई नगर पालिका की 'नेम एंड शेम' नीति पर विवाद, क्या कचरा गाड़ी से नाम उछालना कानूनी है?


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Multai (पाशा खान) पवित्र नगरी मुलताई में इन दिनों नगर पालिका की कचरा गाड़ियों से होने वाले एक अनोखे ऐलान ने शहरवासियों को हैरत में डाल दिया है। नगर पालिका प्रशासन ने बकाया टैक्स वसूली के लिए अब 'पब्लिक शेमिंग' (सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना) का रास्ता अख्तियार किया है। मुनादी की जा रही है कि यदि टैक्स जमा नहीं किया गया, तो डिफॉल्टर्स के नाम कचरा गाड़ी के लाउडस्पीकर पर सार्वजनिक रूप से घोषित किए जाएंगे।

सम्मान के अधिकार पर प्रहार?
नगर पालिका के इस कदम ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। नागरिकों का कहना है कि कचरा गाड़ी का उपयोग शहर को साफ रखने के लिए होना चाहिए, न कि करदाताओं को अपमानित करने के लिए। कई प्रबुद्ध नागरिकों ने इसे 'मानसिक दबाव' बनाने का गलत तरीका करार दिया है।

क्या कहता है कानून और माननीय अदालतें?
इस मामले में कानूनी विशेषज्ञों की राय नगर पालिका के पक्ष में नहीं दिखती। संविधान और अदालतों के पुराने फैसलों के अनुसार:

 * निजता और गरिमा का अधिकार: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट के 'पुट्टस्वामी फैसले' के अनुसार, किसी की आर्थिक जानकारी को इस तरह सार्वजनिक करना निजता (Privacy) का उल्लंघन माना जा सकता है।

 * कोर्ट की सख्त टिप्पणी: इलाहाबाद और अन्य उच्च न्यायालयों ने पूर्व में 'नेम एंड शेम' (नाम उजागर कर शर्मिंदा करना) की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए कहा है कि "प्रशासन को टैक्स वसूलने का हक है, लेकिन किसी की सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल करने का नहीं।"

 * मानहानि का जोखिम: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिकॉर्ड की खराबी के कारण किसी निर्दोष या टैक्स भर चुके व्यक्ति का नाम गलती से पुकारा गया, तो नगर पालिका पर भारी जुर्माने और मानहानि का मुकदमा चलाया जा सकता है।

पुराने विवादों से नहीं लिया सबक
यह पहली बार नहीं है जब देश में इस तरह के तरीके अपनाए गए हों। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के कई शहरों में जब प्रशासन ने 'ढोल-नगाड़े' बजाकर वसूली की कोशिश की थी, तो मानवाधिकार आयोग ने इसे 'अमानवीय' और 'दमनकारी' बताया था। मुलताई नगर पालिका का यह कदम भी उसी श्रेणी में खड़ा नजर आ रहा है।

जनता की मांग
शहरवासियों का कहना है कि नगर पालिका को डिजिटल माध्यमों, कानूनी नोटिस और व्यक्तिगत संवाद के जरिए टैक्स वसूली करनी चाहिए। कचरा गाड़ी, जो स्वच्छता का प्रतीक है, उसका उपयोग नागरिकों को डराने या अपमानित करने के लिए करना लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है।

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