मुलताई। जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ की एक बेहद खौफनाक तस्वीर सामने आई है। मुलताई के पास स्थित ग्राम पारड़सिंगा में अज्ञात लोगों द्वारा सड़क किनारे भारी मात्रा में बायोमेडिकल वेस्ट फेंक दिया गया। संक्रमण फैलाने वाले इस कचरे को देख ग्रामीणों में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी गई।
बीएमओ एक्शन मोड में: टीम ने डाला डेरा
सूचना मिलते ही मुलताई बीएमओ डॉ. गजेंद्र मीणा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच टीम गठित की। बीएमओ के निर्देश पर सीएचओ और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। टीम यह देखकर हैरान रह गई कि संवेदनशील मेडिकल वेस्ट को बिना किसी सुरक्षा मानक के खुले में लावारिस छोड़ दिया गया था।
जांच के घेरे में 'सरकारी सप्लाई'
स्वास्थ्य विभाग की टीम अब इस 'डेथ ट्रैप' के सोर्स को खंगाल रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह शासकीय अस्पतालों को होने वाली सप्लाई का हिस्सा है? विभाग द्वारा बैच नंबर और अन्य कड़ियों को जोड़ा जा रहा है ताकि असली गुनहगार तक पहुँचा जा सके।
कठोर कार्रवाई की चेतावनी
"सड़क किनारे मेडिकल वेस्ट मिलना गंभीर अपराध है। हमने मौके पर पंचनामा तैयार करवा लिया है। यदि इसमें किसी सरकारी संस्था की संलिप्तता मिली या नियमों के विरुद्ध निस्तारण पाया गया, तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा—उन पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।"
— डॉ. गजेंद्र मीणा, बीएमओ, मुलताई
सवालों के घेरे में सिस्टम: आखिर किसकी लापरवाही?
इतनी बड़ी मात्रा में मेडिकल वेस्ट का सार्वजनिक स्थान पर मिलना सिस्टम की बड़ी नाकामी की ओर इशारा करता है।
- क्या प्राइवेट अस्पतालों ने चोरी-छिपे इसे फेंका है?
- या फिर सरकारी स्टॉक को ठिकाने लगाने की कोशिश की गई है?
फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन इस घटना ने पारड़सिंगा सहित पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
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