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अग्नि योद्धाओं पर हमला: जब रक्षक ही असुरक्षित, तो कौन बचाएगा शहर?


आमला/बैतूल : कल दोपहर ग्राम आमाडोह में हुई भीषण आगजनी की घटना ने एक बार फिर मानवता को शर्मसार कर दिया है। जहाँ एक ओर नगर पालिका आमला और मुलताई की टीमें अपनी जान हथेली पर रखकर आग बुझाने का प्रयास कर रही थीं, वहीं दूसरी ओर कुछ असामाजिक तत्वों ने इस आपदा के बीच भी संकीर्ण मानसिकता का परिचय दिया।

घटना का विवरण

​दोपहर लगभग 2:25 बजे डायल 112 से प्राप्त सूचना के आधार पर आमला और मुलताई की फायर ब्रिगेड टीमें आमाडोह पहुँची थीं। आग विकराल रूप ले चुकी थी। इसी दौरान, आमला फायर ब्रिगेड के ड्राइवर अभिजीत माहोरिया के साथ स्थानीय युवकों द्वारा अभद्रता की गई और हाथापाई तक की नौबत आ गई।

​"हम अपनी जान जोखिम में डालकर आग बुझाते हैं, लेकिन अगर मौके पर ही हमारे साथ मारपीट होगी, तो हम निडर होकर अपना कर्तव्य कैसे निभा पाएंगे?" — एक व्यथित कर्मचारी


सुरक्षा पर खड़े हुए बड़े सवाल

​ड्राइवर की सूझबूझ से बड़ी अनहोनी टली। उन्होंने तत्काल साईंखेडा पुलिस को सूचित किया और सुरक्षा की दृष्टि से वाहनों को फोरलेन पर खड़ा कर दिया। बाद में तहसीलदार यशवंत कुमार गिन्नारे के हस्तक्षेप और उनकी मौजूदगी में ही आग पर काबू पाया जा सका।

आज मुख्य प्रश्न यह है:

  • ​क्या आग बुझाने वाले कर्मचारी अब सुरक्षा के बिना फील्ड पर नहीं जा पाएंगे?
  • ​कर्तव्य पालन के दौरान उनके साथ होने वाली हिंसा के खिलाफ सख्त कानून कब बनेगा?
  • ​असामाजिक तत्वों के कारण क्या पूरे गाँव को आग की भेंट चढ़ने देना सही था?

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