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मुलताई में भूकंप के झटकों से दहशत; क्या यह प्राकृतिक आपदा है या भारी विस्फोटों का नतीजा?


मुलताई। पवित्र नगरी मुलताई और इसके आसपास के क्षेत्रों में कल रात महसूस किए गए रहस्यमयी झटकों ने आम जनजीवन को डरा कर रख दिया है। एक के बाद एक आए दो झटकों के बाद पूरे शहर में खौफ का माहौल है। 'All India Khabar' की टीम ने जब ग्राउंड जीरो पर लोगों से बात की, तो चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं।

इन क्षेत्रों के नागरिकों ने की पुष्टि

​मुलताई नगर के विभिन्न वार्डों के जिम्मेदार नागरिकों ने झटकों की तीव्रता और समय की पुष्टि की है:

  • कामथ और नेहरू वार्ड: यहाँ विशाल फुलवार सहित अन्य वार्डवासियों ने तेज कंपन महसूस होने की बात कही।
  • खरसाली रोड: शाम 7:40 बजे यहाँ पहला बड़ा झटका महसूस किया गया, जिससे लोग घरों से बाहर निकल आए।
  • नागपुर नाका और दाल मिल ग्राउंड: जावेद अली शाह और आशु पठान ने इन क्षेत्रों में धरती कांपने की जानकारी दी।
  • इरफान खान के अनुसार, रात 11:08 के आसपास करीब 3 से 4 सेकंड तक तेज कंपन रहा।

5 बार लग चुके हैं झटके: मुलताई की जनता में रोष

​मुलताई के स्थानीय निवासी मदन कलभोर ने बताया कि बीते कुछ समय में वे 5 बार ऐसे झटके महसूस कर चुके हैं। नागरिकों का कहना है कि यह केवल एक बार की घटना नहीं है, बल्कि मुलताई में यह सिलसिला अब बार-बार दोहराया जा रहा है, जिससे भविष्य में किसी बड़े खतरे की आशंका बनी हुई है।

बड़ा सवाल: प्राकृतिक हलचल या 'मैन-मेड' ब्लास्टिंग?

​मुलताई क्षेत्र के नागरिकों ने एक सुर में संदेह जताया है कि यह झटके प्राकृतिक नहीं लग रहे हैं। शैलेन्द्र पवार और अन्य निवासियों का मानना है कि आसपास के क्षेत्रों में होने वाली भारी ब्लास्टिंग इसका मुख्य कारण हो सकती है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को तुरंत जांच करनी चाहिए कि क्या कहीं क्षमता से अधिक बारूद का इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे पूरा मुलताई शहर कांप रहा है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

​मुलताई के कई प्रबुद्ध नागरिकों, ने प्रशासन से जल्द इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द स्थिति स्पष्ट नहीं की, तो मुलताई की जनता SDM को सामूहिक ज्ञापन सौंपकर अपनी नाराजगी दर्ज कराएगी।

पत्रकार पाशा खान की रिपोर्ट:

"जब जनता के घरों की दीवारों में कंपन महसूस होने लगे, तो प्रशासन की खामोशी घातक साबित हो सकती है। मुलताई की जनता को जवाब चाहिए—क्या यह धरती की पुकार है या किसी भारी ब्लास्टिंग का असर?"


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