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मुलताई: कचरा खंती की आग में जल गई 26 लाख की फिल्टर मशीन, नपा की लापरवाही पर उठे सवाल



मुलताई। (पाशा खान) नगर पालिका मुलताई की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों के घेरे में है। कचरा प्रबंधन को आधुनिक बनाने के लिए जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से खरीदी गई लगभग ₹26 लाख की कीमती कचरा फिल्टर मशीन कचरा खंती में लगी आग की भेंट चढ़ गई। इस घटना ने सरकारी संपत्ति के रखरखाव और अधिकारियों की दूरदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का विवरण: धधकती आग के बीच असुरक्षित थी मशीन

​नगर पालिका द्वारा शहर के कचरे के निष्पादन के लिए यह मशीन मंगवाई गई थी और इसे कचरा खंती (ट्रेंचिंग ग्राउंड) में स्थापित किया जाना था। पिछले कुछ दिनों से इस डंपिंग साइट पर भीषण आग लगी हुई है, जिसे बुझाने में फायर ब्रिगेड की टीमें लगातार जुटी हुई थीं।

​हैरानी की बात यह है कि जहाँ पहले से ही आग लगी हो, उसी संवेदनशील स्थान पर इतनी महंगी मशीन को बिना किसी सुरक्षा घेरे या शेड के रख दिया गया। आग की चपेट में आने से मशीन का बेल्ट और एक मोटर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं।


नपा प्रशासन का तर्क: "अभी भुगतान नहीं हुआ"

​जब इस भारी नुकसान को लेकर मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) वीरेंद्र तिवारी से सवाल किया गया, तो उन्होंने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि:

​"मशीन का अभी तक नगर पालिका द्वारा हैंडओवर नहीं लिया गया है और न ही इसकी पेमेंट की गई है।"


उठते सवाल: आखिर जिम्मेदार कौन?

​सीएमओ के बयान के बावजूद स्थानीय नागरिकों और जानकारों ने नगर पालिका की कार्यशैली पर तीखे सवाल उठाए हैं:

  • लापरवाही: यदि मशीन का हैंडओवर नहीं हुआ था, तो उसे असुरक्षित तरीके से आग वाली जगह पर क्यों उतारा गया?
  • सुरक्षा में चूक: क्या प्रशासन को कचरा खंती में लगी आग का अंदाजा नहीं था?
  • आर्थिक क्षति: मशीन चाहे सरकारी हो या वेंडर की, राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान तो हुआ है। इसकी मरम्मत का बोझ अंततः किसी न किसी रूप में जनता के टैक्स पर ही आएगा।

निष्कर्ष

​स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते मशीन को सुरक्षित स्थान पर रखा जाता, तो इस वित्तीय और भौतिक नुकसान को टाला जा सकता था। अब देखना यह होगा कि क्या इस लापरवाही के लिए किसी पर जिम्मेदारी तय की जाती है या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

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1 टिप्पणियाँ

  1. मुलताई में कुछ बैंक, कुछ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बिना पार्किंग के संचालित हो रहे हैं, तथा कुछ लोगों ने पार्किंग के लिए जगह बहुत कम दी है। जो वाहन पार्किंग के लिए पर्याप्त नहीं है। इससे ग्राहको को वाहन खड़े करने में बहुत परेशानी होती है। आखिर बिना पार्किंग के बैंक कैसे संचालित हो रहे हैं। ये तो नियमों का उल्लघंन हो रहा है। सड़क किनारे वाहन खड़े करने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। कई बार दुर्घटना तक हो जाती है। सरकारी जमीन पर वाहन खड़े हो रहे हैं । जबकि जिस भवन मे बैंक संचालित होती है उसकी स्वयं की पार्किंग होना जरूरी है। मुलताई में संचालित सभी बैंकों की पार्किंग व्यवस्था की जांच होना चाहिए।
    कुछ बेसमेंट बिना अनुमति के बने हैं। कुछ व्यावसायिक भवनों के नक्शे बिना पार्किंग दिए पास हुए हैं। कुछ लोगों ने सरकारी जमीन पर पक्का अतिक्रमण कर लिया है। जांच होना चाहिए।
    नाम - रवि खवसे
    शहर - मुलताई
    जिला - बैतूल
    राज्य - मध्यप्रदेश

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