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एक शिक्षक का, राष्ट्रीय तिरंगे झंडे के प्रति "प्रेम"

 

✍️ सैय्यद हमीद अली ✍️

मुलताई / बड़ेगाव - दूसरों को पढ़ाने वाला शिक्षक का ,भारत के राष्ट्रीय तिरंगे झंडे के प्रति, कितना प्यार है, उसका एक उदाहरण उजागर होकर सामने आया है। जो स्वयं ज्ञानी होकर दूसरों को ज्ञान देता है, उसका व्यवहार अगर ऐसा है, तो फिर किसी और को क्या कहा जा सकता है? घटना गत 26 जनवरी 2023, दिन गुरुवार को विकासखंड प्रभात पट्टन की ग्राम पंचायत, बड़े गांव की शासकीय प्राथमिक शाला बड़े गांव की है। इस अवसर पर अपने 74 वे गणतंत्र दिवस पर, पूरे देश में राष्ट्रीय तिरंगा झंडा हर शासकीय इमारतों पर शान से लहराता दिखाई दिया। इस राष्ट्रीय तिरंगे को देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्रियों सहित, सभी शासकीय कर्मचारियों द्वारा, बड़े अदब और सम्मान के साथ, जय घोष नारे के साथ, फहराया जाता है। परंतु शासकीय प्राथमिक शाला बड़े गांव के शिक्षक, जगदीश दोडके द्वारा, राष्ट्रीय तिरंगा झंडा फहराया गया, उसकी बात ही कुछ निराली है? उन्हें देश के राष्ट्रीय तिरंगे से कितना प्यार है, यह बात भी सिद्ध हो जाती हैं? जगदीश दोडके सर ने विश्राम सावधान के कासन के बाद झंडा फहराया? जिससे लगा कि यह राष्ट्रीय तिरंगे झंडे का सरासर अपमान है ?जो कि राष्ट्रीय तिरंगे झंडे की अवमानना अधिनियम के अंतर्गत आता है? झंडे की रस्सी आसानी से खींचकर झंडा फहराया जाता है। फिर झंडे की रस्सी को उसी के खंबे में बांधा जाता है, या लपेटा जाता है? इसके बाद झंडा सलामी के बाद ,सावधान की स्थिति में राष्ट्र गान किया जाता है। यह झंडारोहण करने का सही तरीका है। परंतु शाला के शिक्षक जगदीश दोडके द्वारा, झंडे की रस्सी खींच कर तिरंगा झंडा तो फहराया, परंतु उसकी रस्सी हवा में ही छोड़ दी ? और आनन-फानन में राष्ट्रगान प्रारंभ करवा दिया। तिरंगे झंडे की रस्सी खंभे से नहीं बांधने पर, तिरंगा झंडा नीचे जमीन पर भी गिर सकता था? ऐसा ना हो सके इसके लिए ही फहराते हुए झंडे की रस्सी को, खंभे में कसकर बांधा जाता है? कानूनन यह नियमानुसार राष्ट्रीय तिरंगा झंडा फहराने का गलत तरीका था। जो कि राष्ट्रीय तिरंगे झंडे की अवमानना के अंतर्गत आता है? विडंबना तो यह रही कि, इस अवसर पर उपस्थित किसी भी जनप्रतिनिधि ने उन्हें टोका नहीं? और वह सरासर झंडे का अपमान करते रहे। अब अंदाजा लगाया जा सकता है कि ,दूसरों को पढ़ा कर सीख देने वाला शिक्षक ही जब ,अनपढ़ अज्ञानी जैसे काम करें, तो आम लोगों से क्या उम्मीद की जा सकती है ? ऐसे लोगों को झंडा क्या है? उसकी कीमत क्या है? कैसे तिरंगे झंडे का सम्मान किया जाता है? इसका परीक्षण देना चाहिए? ऐसे ही लोग राष्ट्रीय तिरंगे झंडे को शायद, गज भर का ,तीन रंगों का कपड़े का टुकड़ा समझते हैं ?उसके अधिकार और पावर को नहीं जानते। जबकि शासकीय सेवा में पदस्थ होने के बाद ऐसी बड़ी गलती करते हैं। राष्ट्रीय पर्व पर साधारण लोग भी राष्ट्रीय तिरंगे की जय बोलते हैं ।परंतु कुछ गवार लोग, झंडे की अवमानना करने से भी नहीं चूकते? ऐसे लापरवाह शासकीय कर्मचारी दोषी की श्रेणी में आते हैं, उन्हें राष्ट्रीय सेवा से मुक्त कर देना चाहिए?



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