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मुलताई के ताप्ती गार्डन में पुरूष प्रताड़ना पर आयोजित हुई संगोष्ठी ।
झूठे प्रकरणों से पुरुषों को बचाने के लिए अभियान चला रही एसआईएफ़ संस्था ।
निःशुल्क हेल्पलाईन नंबर - 8882-498-498
Multai district Betul Madhya Pradesh
मुलताई। एसआईएफ़ संस्था बैतूल के तत्वाधान में मंगलवार को मुलताई के ताप्ती गार्डन में पुरुष प्रताड़ना पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में झूठे मामलो से घिरे पुरुष शामिल हुए। इस दौरान पीड़ित व्यक्तियों ने अपनी समस्याओं से संस्था के पदाधिकारियों को अवगत कराया। कई पुरुषों को संगोष्ठी में समस्याओं से निपटने का रास्ता भी मिला।
संगोष्ठी में संस्था के प्रमुख डॉ. संदीप गोहे ने बताया कि मुलताई विधानसभा में भी काफी मात्रा में पुरूष महिलाओं से प्रताड़ित है । आज ताप्ती घाट पर संगोष्ठी में काफी पीड़ित पुरुष आए हैं और हमें हेल्पलाइन नंबर पर भी कॉल आए , हमने पुरुषों को झूठे प्रकरण, दहेज प्रताड़ना के झूठे आरोप से कैसे बचा जा सकता है इसकी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में पुरूष प्रताड़ना एक गंभीर समस्या के रूप में सामने आ रहा है। यह प्रताड़ना चाहे घर में हो, चाहे ऑफिस में हो या बाहर हो, वह किसी न किसी रूप से अपनी पत्नि, ऑफिस सहकर्मी, महिला मित्रों या परिचित स्त्रियों से किसी न किसी रूप में झूठे तरीके से परेशान हो रहा है। डॉ. संदीप गोहे ने बताया कि कोई भी पुरूष चाहे वह अपनी पत्नि, अपनी सहकर्मी, अपनी महिला दोस्त या अन्य किसी परिचित स्त्री से झूठे मामले, धमकी, ब्लेकमेलिंग (व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम आदि पर) से परेशान या प्रताड़ित है तो निःशुल्क हेल्पलाईन नंबर - 8882-498-498 से संपर्क कर समस्या का निदान कर सकते हैं।
पीड़ित महिलाएं भी ले सकती है हमसे मदद
डॉ. संदीप गोहे ने बताया कि ऐसा नहीं है कि वर्तमान में पुरूष ही किसी न किसी रूप से महिलाओं के झूठे मामलों से पीड़ित है, एक महिला भी चाहे वह किसी बेटे की मां हो, बहन हो, बुआ हो या सहकर्मी हो, वे भी किसी दूसरी महिला द्वारा झूठे मामलों में प्रताड़ित हो सकती है। उदाहरण के लिए झूठे दहेज प्रकरणों में पति के अलावा उनकी मां, बहनें, भाभी, बुआ या आसपास के पड़ोसी महिला को भी पत्नि या बहु द्वारा फसा लिया जाता है। डॉ. गोहे ने ऐसी पीड़ित माताओं एवं बहनों से भी आग्रह किया है कि वे भी हेल्पलाईन नंबर - 8882-498-498 से संपर्क कर इन समस्याओं पर चर्चा कर सकती हैं जिन्हें निःशुल्क कानूनी एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श प्रदान किया जाएगा।



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