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नगर में आवारा कुत्तों का आतंक, सड़कों पर चलना हुआ मुश्किल।

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नगर में आवारा कुत्तों का आतंक, सड़कों पर चलना हुआ मुश्किल।

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मुलताई ( सैय्यद हमीद अली) इन दिनों नगर में आवारा कुत्तों को भरमार होने के कारण, आवारा कुत्ते झुंड बना कर रहते हैं। और मौका देखकर चलते राहगीरों पर हमला कर देते हैं। कई बार इंसानों को काट खाने के समाचार भी मिले हैं। परंतु इन आदमखोर आवारा कुत्तों को पकड़ने का कोई प्रयास, नगर पालिका परिषद द्वारा नहीं किया गया। पहले ही अच्छा था, नगरपालिका परिषद आवारा कुत्तों को जहर युक्त गुलाब जामुन देकर, मार देती थी। परंतु अब पशु क्रूरता अधिनियम के तहत, इन को मारना या इनकी जनसंख्या कम करना प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस कारण से नगर में आवारा कुत्तों की जनसंख्या बहुत अधिक हो गई है। तथा यह कुत्ते आदमखोर बनकर नगर की सड़कों पर, रात दिन शिकार करते पाए जाते हैं। फिर इनका शिकार कोई इंसान ही क्यों ना हो? यह आवारा कुत्ते बड़े जानवर, बकरी, गाय, मुर्गा मुर्गी सहित ,छोटे बच्चे, और इंसानों को भी शिकार बना रहे हैं?  यह कैसा कानून है कि, कुत्ते भले ही इंसान को खा जाए, या जख्मी बना दे, परंतु इनका कुछ नहीं किया जाना चाहिए? इन कुत्तों का शिकार बने कई लोगों ने बताया कि, कुत्तों को  पशु क्रूरता अधिनियम, से बाहर करना चाहिए? जिससे कि, इनकी जनसंख्या कम हो, और इन्हें मारा जा सके? जो आदमखोर बन कर आम लोगों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। विवेकानंद वार्ड निवासी, श्रीमती रागिनी शिवहरे ने बताया कि, वह कई बार इन आवारा कुत्तों का शिकार बन चुकी है। कल भी उन पर आवारा कुत्तों ने हमला किया। उन्होंने बड़ी मुश्किल से अपने आप को कुत्तों के आतंक से बचाया। ऐसा और भी लोगों के साथ हो चुका है। नगर के जैन कोल्ड्रिक रोड से गांधी चौक गुजरी तरफ से सड़क मार्ग पर ,अक्सर दर्जनों आवारा कुत्ते लोगों को  घूरते हुए बैठे रहते हैं। यही के कुछ लोग इन आदमखोर कुत्ता को, खाना खिला कर कुत्ता सेवक बन गए हैं। परंतु यह नहीं जानते कि, यह कुत्ते आदमखोर बनकर मौका मिलते ही, लोगों को भी निशाना बना कर जख्मी बना रहे हैं। इन समाज सेवकों ने, नगर में आवारा कुत्तों को कम करने या पकड़वाने का प्रयास करना चाहिए? ना कि इन्हें पालना चाहिए? जबकि आवारा कुत्तों का आतंक प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है? चाहे जो भी हो ,ऐसे आदमखोर बन चुके आवारा कुत्तों का, पशु क्रूरता अधिनियम के घेरे से बाहर कर, इनकी जनसंख्या बहुत कम कर देनी चाहिए? जिससे की आम जनता निडरता से सड़कों पर चल सके, और पवित्र नगरी आतंकियों कुत्तों से मुक्त हो सके?

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