नाजिम अली ने पेश की इमानदारी की मिशाल
मुलताई : ( पाशा खान ) पेशे से दर्जी कुशन वर्क का कार्य करने वाले सैयद नाजिम अली ने रुपए लौटा कर मिसाल पेश कर यह साबित कर दिया है कि इमानदारी अभी जिंदा है। नगर के जामा मस्जिद कांप्लेक्स में कुशन वर्क के साथ सिलाई। मशीन व ट्रॉली बैग व पर सुधारने का काम नाजिम अली करते हैं। उन्हें नगर के भगतसिंह वार्ड की निवासी शिक्षिका श्रीमती वर्षा खेरे द्वारा कुछ बैग व पर्स की सिलाई व चैन सुधारने हेतु दिए थे।
नाजिम अली द्वारा जब पर्स सुधारने के लिए बाहर निकाला तो उसमें उसे लगभग कुल 2000 के अलग अलग नोट मिले। बैग व पर्स दुरुस्त करने के बाद जब शिक्षिका श्रीमती खेरे बैग वापस लेने पहुंची तो नाजिम अली द्वारा सबसे पहले पर्स के भीतर मिले रुपए सौंपे तथा बाद में सुधारे गए बैग वापस दिए । सैयद नाजिम अली ने कहा कि अल्लाह की रहमत बनी हुई है। उन्हें किसी भी तरह की हराम की कमाई नहीं चाहिए। मेहनत से हासिल की गई बरकत ही नेकी है। इस तरह नाजिम अली द्वारा रुपए लौटा कर ईमानदारी की जो मिसाल पेश की जिसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है।


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